歌词
दिखाई देते हैं दूर तक अब भी साएँ कोई
मगर बुलाने से वक्त लौटे ना आए कोई
चलो ना फिर से बिछाएँ दरिया, बजाएँ ढोलक (बजाएँ ढोलक)
लगा के मेहँदी, सुरीले टप्पे सुनाए कोई
पतंग उड़ाएँ, उड़ाएँ, उड़ाएँ, उड़ाएँ
पतंग उड़ाएँ छतों पे चढ़के मोहल्ले वाले
फलक तो साँझा है उस में पेचें लड़ाए कोई
उठो (उठो), उठो कबड्डी-कबड्डी खेलेंगे सरहदों पर
जो आए अब के तो लौटकर फिर ना जाए कोई
नज़र में रहते हो, जब तुम नज़र नहीं आते
ये सुर मिलाते हैं, जब तुम इधर नहीं आते
नज़र में रहते हो, जब तुम नज़र नहीं आते
ये सुर बुलाते हैं, ये सुर बुलाते हैं
जब तुम इधर नहीं आते
ये सुर बुलाते हैं
जब तुम इधर नहीं आते