歌曲 / 歌词

Mein Nazar Se Pee Raha Hun

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歌词

अपनी आवाज़ की लर्ज़िश पे तो क़ाबू पा लूँ
प्यार के बोल तो होठों से निकल जाते है
अपने तेवर तो सँभालो कोई ये न कहे
दिल बदलते हैं तो चेहरे भी बदल जाते हैं।
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए
न झुकाओ तुम निग़ाहें कहीं रात ढल न जाए।
मेरे अश्क भी हैं इसमें ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूने वाले तेरा हाथ जल न जाए।
मेरी ज़िन्दग़ी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दन निकल न जाए।
अभी रात कुछ है बाकी न उठा नक़ाब साकी
तेरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए।
इसी ख़ौफ़ से नशेमन न बना सका मैं 'अनवर'
कि निग़ाह-ए-अहल-ए-गुलशन कहीं फिर बदल न जाए।
लर्ज़िश = Quiver
रिन्द = Drunkard
अहल = Inhabitant, People, Residents