歌词
तेरी लोरी याद है आती, तेरे बिना मैं सो ना पाऊँ
कैसा है ना जाने अँधेरा, देखो, मैं डर-डर जाऊँ
तेरी लोरी याद है आती, तेरे बिना मैं सो ना पाऊँ
कैसा है ना जाने अँधेरा, देखो, मैं डर-डर जाऊँ
उठ के ढूँढूँ चारों तरफ़ मैं, तुझको फिर भी देख ना पाऊँ
मैं जो तुझसे दूर हूँ इतना, कैसे तेरे पास मैं आऊँ, माँ?
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तेरी लोरी याद है आती, तेरे बिना मैं सो ना पाऊँ
कैसा है ना जाने अँधेरा, देखो, मैं डर-डर जाऊँ
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तू बैठी होगी, खाने की थाली, चावल के लड्डू उस पर सजा के
आँखें तेरी रोती होंगी, आने की मेरी आस लगा के
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आहट सुन कर तू जागती होगी, मेरे कदमों की रसोई से आती
भागती होगी फिर कोने-कोने, रुक जाती होगी मुझको ना पा के, माँ
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तेरी लोरी याद है आती, तेरे बिना मैं सो ना पाऊँ
कैसा है ना जाने अँधेरा, देखो, मैं डर-डर जाऊँ
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(ना, ना, ना, ना, ना, ना, ना, ना)
(ना, ना, ना)
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दीवारों पर लटकी पतंगें उड़ जाने को बेचैन होंगी
चरखी पर जो धूल जमी है, धागे पर वो घिसती होगी
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गलियाँ खाली, रस्ते चुप होंगे, पेड़ों पर झूले रूठे होंगे
मेरा टुकड़ा आसमाँ का रोता होगा, माँ
मेरे आँसू उसमें मिले हैं, कैसे उनको, बोलो, छुपाऊँ?