歌词
कहीं शोर, कहीं खामोशी है
सब तेरी ही सरगोशी है
अब हश्र के रोज़ ही टूटेगी
ऐसी ये मेरी बेहोशी है
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
चला भी आ तू कहीं से, किसी बहाने से
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
चलूँ मैं घर से तो दीवारें साथ चलती हैं
चलूँ मैं घर से तो दीवारें साथ चलती हैं
चलूँ मैं घर से तो दीवारें साथ चलती हैं
मेरा वो रिश्ता है अपने गरीबखाने से
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
कहीं मैं खुद से बहुत दूर ना निकल जाऊँ
कहीं मैं खुद से बहुत दूर ना निकल जाऊँ
कहीं मैं खुद से बहुत दूर ना निकल जाऊँ
मैं डर रही हूँ तेरे और पास आने से
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
तेरी तलाश में गुम हूँ कई ज़माने से
चला भी आ तू कहीं से, किसी बहाने से
तेरी तलाश में गुम हूँ