歌词
महफ़िल में छुपाने पड़े जज़्बात किसी से
हो कर भी ना हो पाई मुलाक़ात किसी से
दिन-रात कसक रहती है, कुछ रोज से दिल में
ले बैठे है हम दर्द की सौग़ात किसी से
कुछ उनको तक़्लुफ़ सा है, कुछ हमको हया सी
ऐसे में जो हो भी, तो हो क्या बात किसी से
वो रात जो भर देती हैं दामन में सितारे
माँगी है मेरे दिल ने वो ही रात किसी से