歌词
अपनी तकदीर जो अपने हाथों लिखे
अपनी हस्ती बना सके
राजा या रंक हो, जग उसके संग हो
ज्यादा जो अंक पा सके
नियम हो, नियम हो, नियम हो
जहाँ का नया ये नियम हो
बेड़ी अज्ञान की पिघला के ज्ञान से
बंदी सपने छुड़ा सके
(बंदी सपने छुड़ा सके)
कुदरत ने एक सा हक सबको है दिया
सब हक अपना कमा सकें
नियम हो, नियम हो, नियम हो
जहाँ का नया ये नियम हो
♪
कोई हुनर जिसमें हो समय उसका ही बदलता है
ओ माटी नज़र आता हो पिघल कर सोना उगलता है
क्या लेना जात से, क्या लेना नाम से
पहचाने सबको उनके काम से
बोये दस्तूर ने जितने मतभेद हैं
उनको जड़ से मिटा सकें
राजा या रंक हो, जग उसके संग हो
ज्यादा जो अंक पा सकें
नियम हो, नियम हो, नियम हो
जहाँ का नया ये नियम हो
नियम हो, नियम हो, नियम हो
जहाँ का नया ये नियम हो