歌词
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
उनकी नज़र में कोई तो जादू ज़ुरूर है
जिस पर पड़ी, उसी के जिगर तक उतर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
उस बेवफ़ा की आँख से आंसू झलक पड़े
हसरत भारी निग़ाह बड़ा काम कर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
उनके जमाल-इ-रुख़ पे उन्हीं का जमाल था
वो चल दिए तो रौनक-इ-शाम-ओ-सहर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
उनको ख़बर करो के है बिस्मिल करीब-इ-मर्ग
वो आयेंगे ज़ुरूर जो उन तक ख़बर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई
हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई
महफ़िल में बार बार किसी पर नज़र गई