歌词
इन वादियों में टकरा चुके हैं
हमसे मुसाफ़िर, यूँ तो कई
दिल ना लगाया हमने किसी से
किस्से सुने हैं, यूँ तो कई
ऐसे तुम मिले हो, ऐसे तुम मिले हो
जैसे मिल रही हो इत्र से हवा
काफ़िराना सा है
इश्क़ है या, क्या है?
ऐसे तुम मिले हो, ऐसे तुम मिले हो
जैसे मिल रही हो इत्र से हवा
काफ़िराना सा है
इश्क़ है या, क्या है?
गोदी में पहाड़ियों की उजली दोपहर गुज़ारना
आए, हाए, तेरे साथ में, अच्छा लगे
शर्मीली अखियों से तेरा, मेरी नज़रें उतारना
हाए-हाए, हर बात पे, अच्छा लगे
ढलती हुई शाम ने बताया है, कि दूर मंज़िल पे रात है
मुझको तसल्ली है ये, के होने तलक रात हम-दोनों साथ हैं
काफ़िराना सा है
इश्क़ है या, क्या है?
संग चल रहे हैं, संग चल रहे हैं
धूप के किनारे, छाँव की तरह
काफ़िराना सा है
इश्क़ है या, क्या है?