歌词
कभी कुछ दिन ऐसे भी गुज़रे
लोग कम थे, बातें ज़्यादा
कभी कुछ रातें ऐसी भी गुज़रीं
नींद कम थी, ख़ाब थे ज़्यादा
तो दिल तू बता दे बिखरा है क्यूँ?
तो दिल तू बता दे बिखरा है क्यूँ?
♪
क्यूँ कुछ ना जाँनू मैं?
क्यूँ कुछ ना मानूँ मैं?
क्यूँ लगता है यूँ
खामोशी में ही सुकूँ
तो दिल तू बता दे बिखरा है क्यूँ?
तो दिल तू बता दे बिखरा है क्यूँ?