歌词
३ जुलाई १९४३ को, जब नेताजी singapore आये
तो पूर्व एशिया वासियों की, खुशी का ठिकाना ना रहा
३५ लाख हिन्दुस्तानियों ने
और आजाद हिंद फौज के जवानों, और रहनुमाओं ने
उनके शानदार स्वागत में, ये गीत गाया
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शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी
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शुभाष जान हिन्द है, शुभाष मान हिन्द है
शुभाष आन हिन्द है, शुभाष शान हिन्द है
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी
♪
गली गली, कली कली, ये आनद्वलीप चह चली
गली गली, गली गली, वो आम हल्क गा रहे
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी
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वो मान हिन्द लायेंगे, वो शान हिन्द लायेंगे
फिरंगियों के कौम पर, वो कहर बन के छाएंगे
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी
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ख़ुशी का दौर आ गया, ये शौक बनके छा गया
वो एशिया का आफता, देशिया में आ गया
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए
शुभाष जी, शुभाष जी, वो जान हिन्द आ गए
है नाज जिसपे हिन्द को, वो शान हिन्द आ गए