歌词
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं
कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
उजालों की परियाँ नहाने लगीं
नदी गुनगुनाई ख़यालात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई
ज़ुबाँ सब समझते हैं जज़्बात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
सितारों को शायद ख़बर ही नहीं
मुसाफ़िर ने जाने कहाँ रात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की