歌词
(ओ रे सखी, अब लगने लगी तेरे हाथ पिया की मेहँदी)
(ढोल बजे यूँ ढोल बजे)
(ढोल बजे यूँ ढोल बजेगी सारी महफ़िल ਨੱਚਦੀ)
कभी खन, खन, खन, कभी छन, छन, छन
कभी हौले से, क्या बोले मन
ये रोग जिया का छुप ना सके, हो
ये रोग जिया का छुप ना सके
क्या खूब है ये दीवानापन
कभी खन, खन, खन, कभी छन, छन, छन
कभी हौले से, क्या बोले मन
♪
हो, जाएगी पराए घर, सुख पाएगी पराए घर
सब की दुआएँ तू ले जाएगी पराए घर
डोलिया में डोलेगी तू, कुछ नहीं बोलेगी
ननद, जेठानी तेरा घुँघटा ये खोलेंगी
(ओ रे सखी, अब लगने लगी तेरे हाथ पिया की मेहँदी)
(ढोल बजे यूँ ढोल बजेगी सारी महफ़िल ਨੱਚਦੀ)
कभी खन, खन, खन, कभी छन, छन, छन
कभी हौले से, क्या बोले मन
♪
जागूँ मैं रातों-रातों को
सोचूँ जो तेरी बातों को
जादू ये जाने कैसा है!
हर चेहरा अब तेरे जैसा है
मैं ओढ़ के लाल चुनरिया...
मैं ओढ़ के लाल चुनरिया संग चल दूँगी साजन के आँगन
कभी खन, खन, खन, कभी छन, छन, छन
कभी हौले से, क्या बोले मन
(ओ रे सखी, अब लगने लगी तेरे हाथ पिया की मेहँदी)
(ढोल बजे यूँ ढोल बजे)
(ढोल बजे यूँ ढोल बजेगी सारी महफ़िल ਨੱਚਦੀ)
कभी खन, खन, खन, कभी छन, छन, छन
कभी हौले से, क्या बोले मन
ये रोग जिया का छुप ना सके, हो
ये रोग जिया का छुप ना सके
क्या खूब है ये दीवानापन
कभी ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, कभी छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न
कभी ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, कभी छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न
कभी ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, कभी छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न (ओ रे सखी, अब लगने लगी तेरे हाथ पिया की मेहँदी)
कभी ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, ख-न-न-न-न, कभी छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न, छ-न-न-न-न (ढोल बजे यूँ ढोल बजेगी सारी महफ़िल ਨੱਚਦੀ)