歌词
जब सय्याँ आए शाम को तो लग गए चाँद मेरे नाम को
जब सय्याँ आए शाम को तो लग गए चाँद मेरे नाम को
सर पे रख के नाच फिरी मैं हर जलते हुए इल्ज़ाम को
जब सय्याँ आए शाम को तो लग गए चाँद मेरे नाम को
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दीवार-ओ-दर, चौखट-वौखट बन गए हैं सब सहेली
ये कुछ पूछे, वो कुछ पूछे, कितने जवाब दूँ मैं अकेली?
हज़ारों काम मिल गए हैं यूँ बैठे-बिठाए इस नाकाम को
जब सय्याँ आए शाम को तो लग गए चाँद मेरे नाम को
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ख़ुद को देखने तक की भी फ़ुर्सत मुझको नहीं मिलती
उनके इश्क़ के नूर के आगे शम्मा नहीं जलती
ख़ुद को देखने तक की भी फ़ुर्सत मुझको नहीं मिलती
उनके इश्क़ के नूर के आगे शम्मा नहीं जलती
लाखों नाज़ लग गए हैं फिर ग़ुरूर के इस बदनाम को
जब सय्याँ आए शाम को तो लग गए चाँद मेरे नाम को
सर पे रख के नाच फिरी मैं हर जलते हुए इल्ज़ाम को